Wednesday, March 17, 2010

ख्वाब और ख्याल


रात मैंने
एक ख्वाब को आवाज दी
ख्वाब के दस्तक देने से पहले
एक खूबसूरत ख्याल आया
और मुझे जगाकर
अपने साथ ले गया
चांदनी रात में
ख्वाब ने
सुबह तक इंतजार किया

क्या करें ?
ख्याल खूबसूरत हो तो
वक़्त का पता ही नहीं चलता
सहर हो गयी
ना ख्वाब रहा
ना ख्याल रहा
आँखें बोझिल है
आज दिन में भी
धुंध रहेगी 

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Saturday, March 13, 2010

टूटा तारा

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सुना हें
टूटते तारे को देखकर
जो मांगो मिल जाता हैं
मैं भी तो तारा था
किसी की आँख का
मैं भी तो टूटा हूँ
टूट के बिखरा हूँ
अफशोस फिर भी किसी को
कुछ ना दे सका
कैसे  देता 
बिन मांगे ?
मुझे तो देखा ही नही किसी ने
टूटते बिखरते
कैसे  देखते ?
तारे तो रात को टूटते है
मैं तो टूटा हूँ
दिन के उजालों में 

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