Saturday, March 13, 2010

टूटा तारा

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सुना हें
टूटते तारे को देखकर
जो मांगो मिल जाता हैं
मैं भी तो तारा था
किसी की आँख का
मैं भी तो टूटा हूँ
टूट के बिखरा हूँ
अफशोस फिर भी किसी को
कुछ ना दे सका
कैसे  देता 
बिन मांगे ?
मुझे तो देखा ही नही किसी ने
टूटते बिखरते
कैसे  देखते ?
तारे तो रात को टूटते है
मैं तो टूटा हूँ
दिन के उजालों में 

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8 comments:

  1. टूट के बिखरा हूँ दिन के उजाले में यही अभिव्यक्ति बहुत पसंद आई ..शुक्रिया

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  2. "मुझे तो देखा ही नही किसी ने
    टूटते बिखरते
    कैसे देखते ?
    तारे तो रात को टूटते है
    मैं तो टूटा हूँ
    दिन के उजालों में"
    बहुत खूब - अति सुंदर

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  3. मुझे तो देखा ही नही किसी ने
    टूटते बिखरते
    कैसे देखते ?
    तारे तो रात को टूटते है
    मैं तो टूटा हूँ
    दिन के उजालों में

    Nirjharji,aap hamesha hee achha likhte hain..is naye blogke saath aapka swagat hai..

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  4. Mai Kshama ke saath sahmat hun!

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  5. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  6. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  7. नमस्कार
    ब्लोगिंग की दुनिया में भरापूरा स्वागत करते हैं.आपके ब्लॉग पर आकर कुछ सार्थकता लगी है.यूहीं लगातार बने रहें और बाकी के ब्लोगों पर सफ़र करके अपनी राय जरुर लिखें.यही जीवन है.जो आपको ज्यादा साथियों तक जोड़ पायेगा.

    सादर,

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव
    http://apnimaati.blogspot.com
    http://maniknaamaa.blogspot.com

    अपने ब्लॉग / वेबसाइट का मुफ्त में पंजीकरण हेतु यहाँ सफ़र करिएगा.
    http://apnimaati.feedcluster.com/

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  8. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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