Wednesday, March 17, 2010

ख्वाब और ख्याल


रात मैंने
एक ख्वाब को आवाज दी
ख्वाब के दस्तक देने से पहले
एक खूबसूरत ख्याल आया
और मुझे जगाकर
अपने साथ ले गया
चांदनी रात में
ख्वाब ने
सुबह तक इंतजार किया

क्या करें ?
ख्याल खूबसूरत हो तो
वक़्त का पता ही नहीं चलता
सहर हो गयी
ना ख्वाब रहा
ना ख्याल रहा
आँखें बोझिल है
आज दिन में भी
धुंध रहेगी 

......................

3 comments:

  1. ख्वाब और ख़याल के दायरे में सिमटी रचना अच्छी लगी

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  2. शोधपूर्ण व जानकारी बर्धक लेख लिखने पर आप बधाई के पात्र हैं।

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  3. neer ji...dhund rahei aur bahut khub rahei...wah khwabo aur khayalo ki kya jugalbandi ki hai wah....

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